परमात्मा सशरीर सतलोक गए थे
पाखंडी धर्मगुरु ने काशी नगर में धार्मिक श्रद्धालुओं के मध्य एक मान्यता स्थापित कर दी कि काशी में मरने वाले का मोक्ष होता है और मगहर में जो मरता है वह गधे की योनि को प्राप्त होता है उस समय कबीर साहिब जी धरती पर आए हुए थे उन्होंने अपने तत्वज्ञान से समझाया की सत भक्ति करने वाला है कही भी प्राण त्याग कर दें सीधा सतलोक जाएगा और भक्ति नहीं करने वाला चाहे कहीं पर भी प्राण त्याग दें उसको कर्मानुसार ही फल प्राप्त होता है कबीर साहिब जी ने बहुत समझाया लेकिन धर्म के ठेकेदारों ने कबीर साहिब जी की बात को आगे नहीं आने दिया तो जब कबीर साहिब जी अपने सतलोक जाने का समय निकट आया तो उन्होंने कहा कि मैं मगहर में प्राण त्याग करूँगा बताना मैं कहां जाऊंगा इसलिए परमेश्वर मगहर में प्राण त्यागने की लीला करने के लिए चल पड़े वहां एक आमी नदी थी जिसको शिवजी ने अपने श्राप से सूखा दिया था परमेश्वर कबीर जी ने अपने चमत्कार से उस नदी में जल प्रवाहित करवा दिया जो आज भी बह रही हैं परमात्मा कबीर जी ने मगहर से सशरीर सतलोक गए थे