समाज का उत्थान
समाज- मनुष्य एक सामाजिक प्राणी होने के नाते समाज में रहता है तथा सभी प्रकार की आचार विचार और जीवनशैली समाज से प्राप्त करता है लेकिन आज समाज का भी पतन हो रहा है इसके कई कारण कहे जा सकते हैं
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समाज पतन के कारण- समाज पतन का मुख्य जिम्मेदार मनुष्य स्वयं है जो समाज का अंग है इसका मुख्य कारण अज्ञानता है अज्ञानता के कारण मनुष्य कई प्रकार की आध्यात्मिक,धार्मिक,सामाजिक व,आर्थिक गलतियां करता रहता है जिससे समाज में दिनोंदिन गिरावट आती गई इन सभी में आज हम धार्मिक औरआध्यात्मिकता पर बात करेंगे।आध्यात्मिक जीवन आज चाहे किसी भी धर्म को मानने वाले समाज का हो काफी गिर गया है इसका मुख्य कारण आध्यात्मिकता में पाखंडवाद का प्रवेश है और इसका मुख्य जिम्मेदार समाज का गुरू वर्ग है जो समाज को सही दिशा न देकर समाज को गुमराह किया है और समाज को पाखंड की ओर धकेल कर नास्तिकता की ओर ले जा रहा है आज हम उस चौराहे पर खड़े हैं जहां से नास्तिक होने की सीमा प्रारंभ होती है क्योंकि परमेश्वर से मिलने वाला आध्यात्मिक लाभ अज्ञानी धर्मगुरुओं के कारण नहीं मिल पाया आज हम यह भी जानेंगे कि इस संसार में अध्यात्म क्षेत्र में क्या पैमाना मानकर चलें जिससे हम सही आध्यात्मिक लाभ परमेश्वर से प्राप्त कर सकें
कैसे हो समाज का आध्यात्मिक उत्थान ? -
मानव समाज को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने के लिए हमें सबसे पहले परमेश्वर प्रदत ज्ञान को आधार बनाना पड़ेगा इसके लिए हमारे आध्यात्मिक क्षेत्र के सिलेबस में चार वेद,18 पुराण,श्रीमद भगवद गीता,कुरान,bible, पवित्र ग्रंथों में सबसे पहले हम श्रीमद्भगवद्गीता पर बात करेंगे
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क्या कहता है ?श्रीमद्भगवतगीता जी का ज्ञान-
श्रीमद भगवत गीता का ज्ञान हमें काफी हद तक आध्यात्मिक क्षेत्र में मार्गदर्शन करेगा आइए देखते है गीता जी के अध्याय नंबर 4 श्लोक नंबर 34 में क्या लिखा है
गीता जी के इस श्लोक को देखकर हम सहज में ही यह पता लगा सकते हैं कि श्रीमद्भगवद्गीता में तत्वदर्शी संत की शरण में जाने के लिए कहा गया है तथा तत्वदर्शी संत के बिना अध्यात्म क्षेत्र में सफलता प्राप्त नहीं कर सकते लेकिन हमारे सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आज वर्तमान में तत्वदर्शी संत कौन है?
आपके सबसे बड़े प्रश्न का हल इस वीडियो मे है!
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